आज मेरी रामीन छह महीने की हो गई
आज मेरी बेटी रामीन अपनी ज़िंदगी के पहले छह महीने पूरे कर चुकी है - आधे साल का ये सफर शायद दुनिया के लिए छोटा हो, मगर मेरे लिए ये सबसे खूबसूरत, सबसे मायने रखने वाला वक्त रहा। एक नन्हा सा चेहरा, जो रोज़ थोड़ा और रोशन हुआ… एक मासूम मुस्कान, जो दिल को रोज़ थोड़ा और छू गई। आज का दिन बेहद ख़ास है। क्योंकि आज मेरी अम्मी और मेरी सास - यानी रामीन की दादी और नानी, उसे पहली बार अपने हाथों से कुछ खिलाएंगी। ये सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि वो लम्हा है जहां दो पीढ़ियों की ममता एक साथ उसकी थाली में उतर रही है। एक तरफ दादी की गोद की गर्मी, दूसरी तरफ नानी की आँखों में बरसों की दुआएं — और इन दोनों के बीच बैठी मेरी रामीन, जिसे पता भी नहीं कि आज वो कितनी मोहब्बतों की थाली में पहला निवाला लेने जा रही है। जब वो पहली बार कुछ चखेगी — शायद हल्के से मुस्कराए, शायद चौंक कर देखे, या शायद बिना कुछ समझे, सिर्फ मासूमियत से सब कुछ महसूस करे। शायद वो निवाला छोटा होगा, मगर उस पल में समाया होगा दादी की ममता, नानी की दुआ, और हम सबका बेइंतिहा प्यार। और फिर… उसी लम्हे के...