आज मेरी रामीन छह महीने की हो गई

आज मेरी बेटी रामीन अपनी ज़िंदगी के पहले छह महीने पूरे कर चुकी है - आधे साल का ये सफर शायद दुनिया के लिए छोटा हो, मगर मेरे लिए ये सबसे खूबसूरत, सबसे मायने रखने वाला वक्त रहा।


एक नन्हा सा चेहरा, जो रोज़ थोड़ा और रोशन हुआ… एक मासूम मुस्कान, जो दिल को रोज़ थोड़ा और छू गई। आज का दिन बेहद ख़ास है। क्योंकि आज मेरी अम्मी और मेरी सास - यानी रामीन की दादी और नानी, उसे पहली बार अपने हाथों से कुछ खिलाएंगी।


ये सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि वो लम्हा है जहां दो पीढ़ियों की ममता एक साथ उसकी थाली में उतर रही है। एक तरफ दादी की गोद की गर्मी, दूसरी तरफ नानी की आँखों में बरसों की दुआएं — और इन दोनों के बीच बैठी मेरी रामीन, जिसे पता भी नहीं कि आज वो कितनी मोहब्बतों की थाली में पहला निवाला लेने जा रही है।

जब वो पहली बार कुछ चखेगी — शायद हल्के से मुस्कराए, शायद चौंक कर देखे, या शायद बिना कुछ समझे, सिर्फ मासूमियत से सब कुछ महसूस करे।

शायद वो निवाला छोटा होगा, मगर उस पल में समाया होगा दादी की ममता, नानी की दुआ, और हम सबका बेइंतिहा प्यार।

और फिर… उसी लम्हे के बाद — दिल ने जो कहा, उसे मैंने इन अल्फ़ाज़ों में ढाल दिया:


रामीन—

तू आई तो घर, घर-सा लगा,

चार दीवारों में जैसे रूह आ गई,

जो दीवारें चुप थीं बरसों से,

वो तेरी हँसी से मुस्कराने लगी।


खिड़कियाँ उम्मीदों से खुलने लगीं,

धूप अब सिर्फ़ रौशनी नहीं रही,

वो तेरी मौजूदगी की तरह नरम हो गई।


तेरी नज़रों में इक सुकून है,

जिसे देख के दिल हर बार कहता है —

ये जो बच्ची है,

ये रब की सबसे प्यारी इनायत है।


तेरी हँसी, जैसे सुबह की पहली अज़ान,

तेरा रोना, जैसे रूह की गहराई में उतरती कोई सदा।

तेरे आने से घड़ी की सुइयाँ रुक-सी गई हैं,

अब हर लम्हा सिर्फ तुझे देखने के काबिल लगता है।


तू सोती है तो सारा आलम ठहर जाता है,

तू जागती है तो कायनात में हर चीज़ चलने लगती है।

तू है — और यही सबसे बड़ी बात है,

ना कोई ख्वाब, ना कोई तमन्ना बाक़ी बची है,


रामीन, तू मेरी दुनिया की सबसे हसीन तर्जुमा है।

तेरे बिना सब अधूरा है, और तेरे साथ — सब मुकम्मल।




— आकिव जावेद होना — बस तेरा होना ही — मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी है।


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