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Showing posts from February, 2025

इबादत सा इश्क़, दुआ सा एहसास

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मौन आँखों में चंद ख़्वाब और होंठों पर दुआ लिए अपनी हथेलियों से तुम्हारे नन्हे हाथ टटोलते हुए, तुम्हारी हर सांस महसूसते हुए, हर लम्हा, हर घड़ी रोज़ यूँ पढ़ता हूँ तुम्हें, गोया तुम हो इक नूरानी आयत, और मैं बेकरार सा इबादतगुज़ार, देखता हूँ तुम्हें, मगर हर बार जैसे पहली दफा हो, कभी माथे की पेशानी को चूमकर तो कभी तुम्हारे नर्म गालों को सहलाकर, ताबीज़ सा तुझे सीने से लगा लेता हूँ, कि मेरी हर दुआ बस तुझ तक पहुँचे। -आकिव जावेद 

बिटिया रामीन

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बहुत कुछ है जो तुझसे कहने का दिल करता है... क्या ये नहीं मालूम... पर कुछ तो है... कितने ही शब्द लिखे मिटाये सुबह से... कोई भी वो एहसास बयां नहीं कर पा रहा जो मैं कहना चाहता हूँ... गोया मेरे सारे अल्फ़ाज़ गूंगे हो गए हैं। क्या तू महसूस कर सकती है वो सब, जो मैं कहना चाहता हूँ…? तेरी मासूम हँसी जब पहली बार देखी, ऐसा लगा जैसे वक़्त वहीं ठहर गया हो, वो पहली नज़र का एहसास आज भी मेरे दिल में बसा है। जब पहली बार तुझे गोद में लिया था, तेरी नर्म हथेलियाँ मेरी उँगलियों से लिपट गई थीं, वो नन्हा-सा स्पर्श अब भी मेरी रगों में धड़कता है। रात के आसमान में टिमटिमाते तारे, तेरी आँखों की चमक जैसे, एक नन्ही सी रोशनी, जो मेरे दिल के हर अँधेरे कोने को रोशन कर देती है। दिल चाहता है उन सुनहरे लम्हों को पिरो लूँ, एक खूबसूरत गहने की तरह, या फिर घुंघरू बना के अपने दिल की धड़कनों में बांध लूँ, ताकि जब भी धड़कूँ, सिर्फ़ तेरा नाम गूंजे। - आकिव जावेद

छोटी सी उंगली, बड़ा सा वादा

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जब उसकी नन्हीं उंगलियों ने मेरी ऊंगली को थामा, तो वो सिर्फ एक लम्हा नहीं था—वो एक एहसास था, जो दिल की गहराइयों तक उतर गया। इतनी हल्की पकड़, मगर इतना गहरा वादा। जैसे उसने कह दिया हो— “बाबा, अब हमेशा मेरा हाथ थामे रखना। उसकी मासूमियत ने मेरी रूह को छू लिया। वो छोटी-सी मुट्ठी जो अभी कुछ भी पकड़ना नहीं जानती, उसने मेरे पूरे वजूद को अपनी गिरफ़्त में ले लिया। एक अनदेखा रिश्ता, जो लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं, सिर्फ एहसासों में बसता है। ये बस उंगली पकड़ना नहीं था, ये मेरी जिम्मेदारियों को पकड़ना था, मेरे हर डर को मिटाना था, और मेरे हर सपने को एक नई राह दिखाना था। उस छोटे से हाथ की गर्मी में मैंने अपनी पूरी दुनिया महसूस कर ली। रामीन, तुम्हारी इन नन्हीं उंगलियों की हल्की पकड़ मेरे लिए दुनिया की सबसे मजबूत डोर बन गई है। जब भी तुम लड़खड़ाओगी, जब भी दुनिया की भीड़ में तुम्हें अपना रास्ता खोया सा लगेगा, मैं तुम्हें तुम्हारी मंज़िल तक ले जाऊँगा। मैं तुम्हारा पहला सहारा हूँ, और तुम मेरी आखिरी दुआ। ये हाथ जब तक ताक़तवर है, तुम्हारी हिफ़ाज़त के लिए उठा रहेगा—और जब थक जाएगा, तब भी तुम्हारे लिए दुआओं में जुड़...