नाचीज़ आसमा के तले नात

नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा... 
तखय्युल मे परवाज़ करता रहा.
लोग आते रहे मजमा बढ़ता रहा,
नारह अल्लाहु अकबर का लगता रहा. 
नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा...

पतिंगे परिंदे भी आने लगे, 
अपनी आमद का अहसास कराने लगे. 
खुशियों का इजहार करने लगे, 
नग्मे सरकार सब गुनगुनाने लगे. 
नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा... 

रंग बिरंगी ख़ुशनुमा तितलियां आ गईं, 
बज्म सरकार पे शामियाना बनीं. 
अपने हुस्न की नुमाइश भी करने लगीं,
अदब से झुकतीं और उड़ने लगीं. 
नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा... 

देखिये देखिए जुगनुवें आ गईं, 
सारे माहौल पे कुमकुमा बन गईं. 
रौशनी की बरसात करने लगीं, 
जगमगाती रहीं और टिमटिमाती रहीं. 
नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा... 

खूबसूरत हसीं मोर भी आ गए, 
पिव पिव की आवाज करने लगे. 
रक्स करने लगे ठुमकी लगाने लगे,
लोगों का दिल भी लुभाने लगे. 
नाचीज़ आसमा के तले नात पढ़ता रहा...

लोग अचम्भे मे थे करिश्मा चल पड़ा, 
पतिंगों परिंदों का सिलसिला चल पड़ा. 
मजमा सकते मे था इक समा बंध गया, 
थी कशिश नात मे सब को आना पड़ा. 
'मुफ़लिस' आसमा के तले नात पढ़ता रहा...

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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