जहां जिक्र ए रसूल कतआ
जहां जिक्र ए रसूल होता है,
रहमतों का नुजूल होता है.
पढ़िए पढ़िए दरूद पाक पढ़िए,
जो बारगाहे रिसालत कबूल होता है.
शब की बेदारी का ज़ज्बा देखकर,
'मुफ़लिस' शैतां मलूल होता है.
- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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