किसी सिद्दीक नात

किसी सिद्दीक को नारे जहन्नुम छू नहीं सकती, 
जो सादिक हैं कभी उनको निदामत छू नहीं सकती. 

अमल सच्चा जहन सच्चा है तन बदन सच्चा, 
सदाकत ही अमानत है ख़यानत छू नहीं सकती.

सेराते मुस्तकीम से हट रही है कौमे मुस्लिम, 
अगर रब ने हिदायत दी हिमाकत छू नहीं सकती. 

अगर इंसान हो तो इंसानियत को जेबतन कर लो, 
शराफत कदम चूमेगी ज़लालत छू नहीं सकती. 

सलीका सीख लो 'मुफ़लिस' हक़ परस्ती का, 
हकीकत रास आएगी हिकारत छू नहीं सकती. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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