है परवाज़ इंसां नात

है परवाज़ इंसां की ऊंची पर मिस्ले मुस्तफा नहीं, 
जिबरीले अमीं के रुके कदम बचेंगे पर बाखुदा नहीं. 

अब जाइए तन्हा हुजूर रब आपसे जुदा नहीं, 
अर्शे बरीं तक गए मुहम्मद जहां किसी की रिसा नहीं. 

गारे हेरा मे मिली नुबूव्वत नबी से कुछ भी छुपा नहीं,
महबूब मुहिब मसरुर मगन बीच मे है खला नहीं. 

महशर मे नवाजेगा खुदा नमाज जिनकी कजा नहीं, 
'मुफ़लिस' पे है नजरे करम कोई शिकवा गिला नहीं. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

Comments

Popular posts from this blog

आज मेरी रामीन छह महीने की हो गई

GEM Award (Q1 - 2025) Emirates Islamic Bank

हैप्पी 1st बर्थडे मेरी जान