कुछ इस तरह नात

कुछ इस तरह हुसैन ने दिरसे वफा दिया, 
जब कशमकशे राह पड़ी मुस्करा दिया. 

आले रसूल की जरा अजमत को देखिए, 
जिस जा झुकाया सर वहीं काबा बना दिया. 

परवा ना की हुसैन ने तीर व तेग की, 
वक्ते नमाज आया तो सर को झुका लिया. 

सर देके राहे हक मे देखो हुसैन ने, 
तेगों के साये मे हमे जीना सिखा दिया. 

ताकत नहीं कलम मे जो लिखूं वस्फे हुसैन, 
'मुफ़लिस' को राहे हक पे चलना सिखा दिया. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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