रब की रचाई नात
रब की रचाई दुनिया पे एहसाने मुस्तफा है
हर रूह के मसीहा ये आने मुस्तफा है.
दश्त उटठे सूरज पलटा चांद दो टुकड़े हुआ,
हर शै पे है हुकूमत ये शाने मुस्तफा है.
अदना सी इक करामत पे अंगुस्त बनी चश्मा,
सैराब हुए प्यासे ये फैजाने मुस्तफा है.
बू जहल ने पूछा मुट्ठी मे मेरे क्या है,
कंकर ने पढ़कर कलमा कहा ये पहचाने मुस्तफा है.
अर्शे बरीं पे पहुंचे दीदार मुहिब आक़ा,
'मुफ़लिस' सौगात मे नमाज मिली जो ईमाने मुस्तफा है.
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
Comments
Post a Comment