परवरदिगार मुफ़लिस दुआ

परवरदिगार 'मुफ़लिस' मुहताज है तुम्हारा,
संभले मुकद्दर सबका हो जाए इक इशारा. 

जिंदगी का सफर पुरखतर है मगर, 
बेसहारों को सरकार देगें सहारा. 

हैं मोहसिन वो ग़मख्वार आक़ा हमारे, 
मुश्किलों मे उन्हें जब किसी ने पुकारा. 

ज़िक्र ए खुदा हबीब है इंसां के लिए बस, 
आसान होगी मंजिल है अकीदह हमारा. 

दोनों जहां के मालिक बंदों पे तू नजर कर, 
करदे अता तू इतना होता रहे गुजारा. 


- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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