बज्म सरकार नात
बज्म सरकार सजाया तो बुरा मान गए,
नात महबूब सुनाया तो बुरा मान गए.
बुग्ज सीने का छुपाये ना छुपा,
जिक्र वालियों का जो आया तो बुरा मान गए.
आन वाहिद मे गए और लौटे,
हाल मैराज बताया तो बुरा मान गए.
मोमिन की जियाफत पे बातिल हुआ बरहना,
जाम कौसर जो पिलाया तो बुरा मान गए.
'मुफ़लिस' तेरे अशआर के अल्फाज़ मिस्ल तीर,
या मुहम्मद जो पुकारा तो बुरा मान गए.
- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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