जिस दिल से नात

जिस दिल से अल्लाह की अजमत चली गई,
कितना है बदनसीब वो जन्नत चली गई.

निस्बत दिली नहीं जिसे आले रसूल से, 
कर ले यकीन नादां रहमत चली गई. 

मेहमानों के आने से हुई रिज्क मे बरकत, 
एहसास कमतरी की वहशत चली गई. 

किरदार है इंसा का अतवार पे मुबनी, 
अख़लाक़ से गिरा तो ग़ैरत चली गई. 

'मुफ़लिस' अगर पीना है तो खाने खुदा मे पी, 
इक बार अगर पी ली तो गफलत चली गई. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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