हुसैन आजम को नात

हुसैन आजम को कूफा बुला के, 
की है वादा खिलाफी मिला के. 

कर्बला की जमीं खूं की प्यासी, 
जामे शहादत पिया मुस्करा के. 

नाम इस्लाम जिंदा किया है, 
सर को सजदे मे अपने कटा के. 

हक़ व बातिल का तू फैसला कर, 
जुल्म जालिम ना ढाया बुला के. 

जगह जन्नत मे मखसूस पायी, 
'मुफ़लिस' किया वादा नाना से निभा के. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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