गुलशने दीं नात
गुलशने दीं का ये जीशान बड़ा प्यारा है,
या नबी आपका फरमान बड़ा प्यारा है.
हुजूर आए तो कुरआने अजीम भी आया,
उन सहीफों मे ये कुरआन बड़ा प्यारा है.
यूँ तो सारे महीने हैं मुकद्दस लेकिन,
उन महीनों मे ये रमजान बड़ा प्यारा है.
जिस ने इस दौर मे ईमां की हिफाजत कर ली,
बा खुदा आज वो इंसान बड़ा प्यारा है.
दरे अकदस पे बा अदब जिबरील खड़े,
या नबी आपका दरबान बड़ा प्यारा है.
हाजिरी देते हैं चौखट पे शाह व गदा,
मेरे अजमेर का सुल्तान बड़ा प्यारा है.
बज्म सरकार मे हाजिर हैं खास व आम मगर,
'मुफ़लिस' चारों खुलफाओं का ईमान बड़ा प्यारा है.
- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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