नक्श पा जब नात

नक्श पा जब मुहम्मद के पाने लगे, 
नग्मे सरकार सब गुनगुनाने लगे. 

सारा माहौल रौशन हुआ नूर से, 
जब हबीबे खुदा मुस्कराने लगे. 

देखकर रुखे जेबा पे ऐसी जिया, 
चांद तारे सभी शर्म खाने लगे. 

कंकरों ने भी मुट्ठी मे कलमा पढा, 
बातिल दामन मे मुह को छुपाने लगे. 

पूछा सिद्दीक क्या छोड़ आए हो घर, 
बस खुदा और रसुल हैं बताने लगे. 

रश्क 'मुफ़लिस' तू कर अपने अशआर पे, 
बज्में सरकार पे आज छाने लगे. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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