गुलामों की नात
गुलामों की सफों मे हजरते यूसुफ का नाम आया,
उधर जोशे जुनूं मे खुद ज़ुलैख़ा का पयाम आया.
बिला ताखीर यूसुफ को बुलाया महल के अंदर,
ना कोई चाल हर बा हजरते यूसुफ के काम आया.
खुदा साबित कदम रक्खे उठे हैं दस्त यूसुफ के,
हमारे नफ्स की अब आजमाइश का मकाम आया.
ना छूटा कैद मे भी सब्र व इसतकलाल का दामन,
नवाजह रब ने ऐ 'मुफ़लिस' जेरे कदम शाही निजाम आया.
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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