फेल नाकिस कतआ

फेल नाकिस पे गुजरी जिंदगी है, 
मुह दिखाना हश्र मे शर्मिंदगी है. 

सिवा मायूसी के हासिल नहीं कुछ,
गो लगाया बारहा पाबन्दगी है. 

अपने अतवार पे नादिम है 'मुफ़लिस'
रहीमी पे नजर और बंदगी है. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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