करम फरमा कतआ

करम फरमा करम कीजिए करम का ही सहारा है, 
मिले हसनैन का सदका ये जानों तन तुम्हारा है. 
हसन व हुसैन जन्नती दो फूल हैं मुफ़लिस, 
सहारे बेसहारों के अकीदह ये हमारा है. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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