सब्र की नात
सब्र की तलकीन करता है खुदा,
कुरआन में ताकीद आयी बारहा.
सब्र तकवा का है लाजमी जुज,
सब्र पर राजी खुदा उसकी रज़ा.
अक्ल जायल करता है गुस्सा हराम,
सब्र ही जिसका बदल होता सदा.
मुश्किलों मे सब्र बन जाता है ढ़ाल,
फर्ज खुश असलूवी से करता है अदा.
सब्र का दामन तू भी 'मुफ़लिस' थाम ले,
सूरते वल अश्र करती है नेदा.
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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