फर्श ता अर्श सेहरा

फर्श ता अर्श मची धूम आज सेहरे की, 
दश्त नाजुक ने गूंधी है लड़ी सेहरे की. 

बढ़ी जिबाइशे बारात हूर गुलमां से, 
फ़लक पे रश्क है नौशाह तेरे सेहरे की. 

मां व भाई बहन हैं मसरूर मगन, 
जन्नती फूलों की लड़ियां हैं नौशाह तेरे सेहरे की. 

दश्त शफकत जब उठे वालिद के हैं, 
कैसे अंदाज से सरकी है लड़ी सेहरे की. 

आदम व हव्वा की मुहब्बत कर अता तुरफैन मे, 
'मुफ़लिस' की सुन ले यारब रह जाए लाज सेहरे की. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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