आज मेरी बेटी रामीन अपनी ज़िंदगी के पहले छह महीने पूरे कर चुकी है - आधे साल का ये सफर शायद दुनिया के लिए छोटा हो, मगर मेरे लिए ये सबसे खूबसूरत, सबसे मायने रखने वाला वक्त रहा। एक नन्हा सा चेहरा, जो रोज़ थोड़ा और रोशन हुआ… एक मासूम मुस्कान, जो दिल को रोज़ थोड़ा और छू गई। आज का दिन बेहद ख़ास है। क्योंकि आज मेरी अम्मी और मेरी सास - यानी रामीन की दादी और नानी, उसे पहली बार अपने हाथों से कुछ खिलाएंगी। ये सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि वो लम्हा है जहां दो पीढ़ियों की ममता एक साथ उसकी थाली में उतर रही है। एक तरफ दादी की गोद की गर्मी, दूसरी तरफ नानी की आँखों में बरसों की दुआएं — और इन दोनों के बीच बैठी मेरी रामीन, जिसे पता भी नहीं कि आज वो कितनी मोहब्बतों की थाली में पहला निवाला लेने जा रही है। जब वो पहली बार कुछ चखेगी — शायद हल्के से मुस्कराए, शायद चौंक कर देखे, या शायद बिना कुछ समझे, सिर्फ मासूमियत से सब कुछ महसूस करे। शायद वो निवाला छोटा होगा, मगर उस पल में समाया होगा दादी की ममता, नानी की दुआ, और हम सबका बेइंतिहा प्यार। और फिर… उसी लम्हे के...
Thrilled to Share My (GEM Q1 - 2025) Achievement 🎉 I am truly humbled to receive the GEM Q1 Award 🏆. This recognition is not just a personal achievement but also a reflection of the continuous guidance, leadership, and support I have received at my workplace. A heartfelt thanks to Mr. Feroz Sir for his inspiring leadership, and Mr. Nadeem Sir for his constant encouragement and support throughout this journey. This award inspires me to continue striving for excellence and to contribute even more in the coming quarters. 🚀
आज मेरी बेटी रामीन पूरी 1 साल की हो गई। एक साल… लोग कहते हैं, एक साल में क्या बदलता है? पर मेरे लिए यह साल मेरी पूरी ज़िंदगी बदल कर रख गया। इस एक साल में… एक नन्हा चेहरा हर दिन थोड़ा और खिलता गया, एक मासूम मुस्कान रोज़ दिल को छूती रही, और एक छोटा सा फरिश्ता धीरे-धीरे हमारी दुनिया का सबसे बड़ा सुकून बन गया। 27 जनवरी सिर्फ उसकी जन्मतिथि नहीं, यह वह दिन है जब हमारे घर में रौनक, बरकत और मोहब्बत ने एक साथ दस्तक दी थी। आज जब मैं उसे देखता हूँ, तो लगता है जैसे कल ही मेरी गोद में आई थी — और आज, एक साल की हो चुकी है। समय जल्दी बीता, लेकिन हर लम्हा हमेशा के लिए मेरी रूह में दर्ज हो गया। इस एक साल में उसे उठना, पलटना, थोड़ा चलना सीखते देखा… पहली मुस्कान, पहला दाँत, पहली आवाज़… हर “पहली बार” ने मुझे फिर से जीना सिखाया। और आज, उसके पहले जन्मदिन पर — दिल अपने आप इन अल्फ़ाज़ों में ढल गया: रामीन, तू आई तो जिंदगी में हलचल नहीं, बल्कि एक अनकहा सुकून उतर आया। तेरे छोटे-छोटे कदमों ने घर के हर कोने को अपनी कहानी सुना दी। तेरी पकड़ में मेरी उँगली नहीं, पर मेरी पूरी दुनिया तेरे साथ बंध चुकी है। तेरी पहली हँस...
Comments
Post a Comment