अल्लाह के कुदरत नात

अल्लाह के कुदरत के आइना थे मुस्तफा, 
हर दिल अजीज और सब के सहारे थे मुस्तफा. 

आए थे उमर कत्ल को ले के शमशीर बरहना, 
अपना बना के उनको कलमा पढ़ाए थे मुस्तफा. 

हाजत थी सख्त पानी की परीशां थे सहाबा, 
अंगुस्त को ही दरिया बनाए थे मुस्तफा. 

शजर व हजर ताजीम मे खम होते बा अदब, 
जिस सिम्त व जिस जा से निकलते थे मुस्तफा. 

सारे सहाबी और हुजूर दावते जाबिर मे आए थे, 
बच्चों को जिला के 'मुफ़लिस' शिकम सेर खिलाए थे मुस्तफा. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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