ख्वाजा प्यारे नात

ख्वाजा प्यारे की महफिल सजा के जश्न उनका मनाते रहेंगे. 
रास आयी उनकी गुलामी दर पे पलकें बिछाते रहेंगे. 

लाए तशरीफ अजमेर ख्वाजा लगा सागर पे राजा का पहरा, 
इन्हें पानी का कतरा मयस्सर ना हो लोग आते व जाते रहेंगे. 

तेवर बातिल के बदले हुए देखकर हुक्म काशा को ख्वाजा ने दे ही दिया, 
आया कूजे मे है सारा पानी खुद पियेंगे पिलाते रहेंगे. 

बारिश की आतिशों की जयपाल ने बाल बीका हुआ ना किसी का, 
जूतियां सर चढीं तौबा करके कहा दर का रस्ता दिखाते रहेगें. 

किस कदर है हसीं आज मंजर हर नजर मे बसा सब्ज गुंबद, 
इस अजमेर की सरजमीं पर मांगते और पाते रहेंगे. 

हैं शाह व गदा सब ही यक्शां सर झुकाते हैं चौखट पे आके. 
पलक झपकते ही पूरी हो दिल की तमन्ना झोली भर लो दिलाते रहेंगे. 

नात की ही बदौलत ऐ 'मुफ़लिस' उनके दर की मिली है गुलामी, 
परचम सरकार ख्वाजा उठा के याद ताजा कराते रहेगें. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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