गुनहगारों की नात

गुनाहगारों की तू इल्तिजा सुन ले या रब,
है नेदामत की तौबा कबूल कर ले या रब.

इस्लामी तालीम है उरुज पर मगर,
उन्हें तौफीक अमल का हौसला दे दे या रब. 

मस्जिदें तो बहुत हैं पर नमाजी नहीं, 
सज्दों की तड़प सीने मे उनके बसा दे या रब. 

अजब है नहीं ग़ज़ब आए किधर से, 
उस आफत बला से बचाना ऐ या रब. 

जरूरत है दे आज मरदे मुजाहिद, 
जो किरदार बेलाली अदा करदे या रब. 

गफलत की नींद ग़ालिब गाफिल है मुसलमां, 
'मुफ़लिस' की मुद्दुआ है बेदार कर दे या रब. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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