महशर की तमाजत नात
महशर की तमाजत के मंज़र अजीब होंगे,
मुरझाए हुए चेहरों के आक़ा तबीब होंगे.
अलम के साये तले रंज के मारे होंगे,
मिल जायेंगे सरकार जिनके नसीब होंगे.
मायूस होके लौटे हर नबी के दर से,
ये नजरे तलाश लेंगी जिस जा हबीब होंगे.
नफ्सी नफ्सी होगी पड़ी आमाल नामा दस्त मे,
यही आमाल नामे 'मुफ़लिस' रफीक व रकीब होंगे.
बाबे मीजां पे गुनाहगार परेशां होंगे,
बिला तफरीक होगा अज्ल अमीर व गरीब होंगे.
रब्बे हब्ली कहते नबी मीजान पे,
बख़्शिश करा के रब से खुद भी करीब होंगे.
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
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