जेबतन कर लिया नात

जेबतन कर लिया जामे तकवा मगर, 
निगह पैनी मे आते हो नंगे नजर. 

बातिल को जाहिर के रंग मे रंगों, 
होगी आसां बहुत आखिरत की डगर. 

जिंदगी मे दखल नफ्स नाकिस ना हो, 
ईमां वालों पे पड़ता ना इसका असर. 

अल्लाह वालों के नक्शे कदम पर चलो, 
आकबत होगी रौशन मिले मीठा समर. 

अफजल मखलूक का हक अदा तो करो, 
सजदा करते नजर आते शम्स व कमर. 

तकब्बुर रिया से बचो ता उमर, 
कामयाबी का 'मुफ़लिस' है बेहतर हुनर. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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