आज सुन्नत सेहरा
आज सुन्नते रसूल की तकमील हुई है,
सेहरे से दो सितारों की तमसील हुई है.
ये शर्फ मिला सेहरे को नौशा के बदौलत,
चेहरे की जिया सेहरे मे तहलील हुई है.
हर सिम्त है अन्वार तजल्ली का इक समां,
नूरे नज़र के नूर की इक झील हुई है.
हरशू है महक और फिज़ायें हैं मुअत्तर,
बारात आज खुशियों मे सील हुई है.
वालिद के रूखे ताबां पे लोगों की नज़र है,
खुद उनके ही एहसास की तकमील हुई है.
अजीज व अकारिब नाजां व मगन हैं,
जिस खूबी से बारात की तसकील हुई है.
'मुफ़लिस' की मुददुआ है रहें साद व सलामत,
आज खालिक की रहमतों की तनजील हुई है.
- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश
Comments
Post a Comment