आसताने नबी नात

आसताने नबी देखते रह गए, 
उसके दीवार व दर देखते रह गए. 

तलब कर ही लिया बेसहारों को है, 
हुआ नजरे करम देखते रह गए. 

आंखे खुली तो खुलीं रह गयीं, 
दीवानापन देखिए देखते रह गए. 

गुंबदे खजरा का साया ना आया नजर, 
नजरे उठती रहीं देखते रह गए. 

करम फरमा हैं मेरे शाहे उमम, 
'मुफ़लिस' कोई खाली ना लौटा देखते रह गए. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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