आगाज नए बाब नात

आगाज नए बाब का लायी सबा मदीने से, 
फूटी रहमत की किरन बा खुदा मदीने से. 

हुजूर आए तो जुलमत कदे मायूस हुए,
तीरगी दूर हुई फैली जिया मदीने से. 

अमीरो गरीब पाते हैं दर से तेरे, 
मांगने वाले को मिलता सिवा मदीने से. 

दीन मिल्लत के लिए नजदियत बना नासूर, 
इलाही निकले नजदी वबा मदीने से. 

हर शिफा खाने से अच्छी गली मदीने की,
मरीज़ पाए दवा और शिफा मदीने से. 

'मुफ़लिस' का मसगला है फकत नाते मुस्तफा, 
रहे नसीब मे निस्बत सदा मदीने से. 

- मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस'
मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

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