मैं हूँ वो पिता



मैं हूँ वो पिता। 

जिसने तुम्हें दुनिया में लाने से पहले  
तुम्हारे हर कदम की परवाह की,  
तुम्हारी माँ का हाथ थामे रखा,  
जब तुम्हारे आने की ख़बर से  
हमारी ज़िन्दगी बदल रही थी।  
न कभी अपनी ख़ुशी को तुम पर थोपा,  
और न कभी तुम्हारे सपनों को दबाया।

मैं हूँ वो पिता। 

जिसने रातों में जागकर तुम्हें देखा,  
तुम्हारी हर मुस्कान में अपनी दुनिया पाई।  
जो तुम्हें सिखाना चाहता है कि  
प्यार और इज़्ज़त की असली पहचान क्या है,  
जो तुम्हें गिरकर फिर खड़े होने की हिम्मत देता है,  
और हर कदम पर तुम्हारे साथ खड़ा है।  

मैं हूँ वो पिता। 

जो अपनी ख्वाहिशों को तुम्हारी माँ की मुस्कान में ढूंढ़ता है,  
जो तुम्हारी माँ के हर बलिदान को समझता है,  
और उसकी हिम्मत में अपनी ताकत देखता है।  
मैं वो हूँ, जो घर के हर कोने में उसकी ममता की खुशबू महसूस करता है,  
जो उसके साथ मिलकर तुम्हें वो सब देने की कोशिश करता है,  
जिसकी तुम्हें ज़रूरत है, और जिससे तुम्हारी ज़िन्दगी संवर सके।  

मैं हूँ वो पिता।  

जो दुनिया के हर तूफ़ान से तुम्हारी और तुम्हारी माँ की हिफ़ाज़त करता है,  
जिसने अपने सपने तुम्हारी माँ और तुम्हारे नाम कर दिए हैं।  
मैं वो हूँ, जो अपने प्यार को कभी शोर में नहीं कहता,  
मगर उसके हर लफ्ज़ में एक दुनिया बसी है—तुम दोनों के लिए।

- आक़िव जावेद 

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