रामीन : इक नई रात

वैसे तो दुनिया की हर रात अपनी एक कहानी लेकर आती है, लेकिन 27 जनवरी 2025 की रात जावेद परिवार के लिए कुछ खास थी। इस रात में जो खामोशी थी, वो हर रात की खामोशी से अलग थी। आसमान पर तारों की रोशनी में एक अनकही चमक थी और दिलों में एक अजीब सी बेचैनी। एक नई रात, एक नई ज़िंदगी।

सर्दी की वो रात बाकी दिनों की तरह लग रही थी, लेकिन शायद आज कुदरत ने कुछ अलग सोचा था। हवा में एक अजीब सी नरमी थी, और घड़ी की सुइयां जैसे किसी खास पल का इंतज़ार कर रही थीं। ये रात बाकियों से अलग थी, क्योंकि आज मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी।

अस्पताल के उस छोटे से कमरे में बैठा, मैं हर एक पल गिन रहा था। अंदर से नर्स की हलचल और बाहर इंतज़ार करते मेरे परिवार की दुआएं—सबकुछ जैसे ठहर सा गया था। तभी एक चीख सी सुनाई दी, और फिर कुछ ही पलों में एक मासूम सी रोने की आवाज़ मेरे कानों तक पहुंची। मेरी धड़कनें तेज हो गईं।

“मुबारक हो, आपकी बेटी हुई है,” नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा।

कुछ पलों के लिए जैसे पूरी दुनिया थम गई। जब मैंने उसे पहली बार देखा, वो मेरे हाथों में एक नन्हीं परी की तरह लग रही थी। उसका मासूम चेहरा, उसकी बंद आँखें, और उसके छोटे-छोटे हाथ—सबकुछ इतना परफेक्ट था कि लगा जैसे खुदा ने अपनी सारी मोहब्बत उसमें समेट दी हो।

उसकी पहली मुस्कान ने जैसे मेरे दिल को रोक दिया हो। वो मेरी उंगली पकड़ने की कोशिश कर रही थी, और उस एक पल में मैंने महसूस किया कि अब मेरी ज़िंदगी का हर लम्हा सिर्फ और सिर्फ उसकी खातिर होगा।

तब मैंने उसके चेहरे पर गौर किया। उसकी नाक, उसकी आँखें, और उसके होंठों में मुझे अपनी तफसीर का अक्स नजर आया। उसने मेरी मोहब्बत को नयी पहचान दी थी। वो हमारी मोहब्बत का सबसे खूबसूरत फल थी।

हालाँकि, जो भी रामीन को देखता, अपनी नजरों से उसे परखने लगता। हर कोई अपनी तरफ से अंदाज़ा लगाने में मशगूल था—कोई कहता, “नाक तो बिल्कुल फलाँ पर गई है,” तो कोई कहता, “आँखें तो फलाँ से मिलती हैं।” कोई होंठों को देखकर किसी और की झलक देखता, तो कोई माथे की बनावट को किसी से जोड़ देता। मगर मैं मुस्कुराता रहा, क्योंकि मेरे लिए वो बस मेरी तफसीर की परछाई थी—हमारी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत तसवीर।

जब मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया, तो वो एहसास ऐसा था जो शब्दों में बयान करना मुमकिन नहीं। ऐसा लगा जैसे मैं पूरी कायनात को अपनी बाहों में समेटे हुए हूं। उसकी छोटी-छोटी धड़कनें मेरे दिल की हर धड़कन के साथ एक लय में थीं।

उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि मैं अब सिर्फ एक इंसान नहीं, एक बाबा बन चुका हूं। ये नया रिश्ता मेरे लिए सिर्फ एक खुशी नहीं था, ये एक जिम्मेदारी थी—एक ऐसी जिम्मेदारी जो मैंने खुशी-खुशी ली थी।

तफसीर बेड पर लेटी थी, उसकी आँखों में आँसू थे। मैंने उसकी तरफ देखा और महसूस किया कि ये सफर सिर्फ मेरा नहीं था। उसने अपने जिस्म और रूह से इस सफर को जिया था। उसकी हर तकलीफ, हर दर्द, और हर दुआ ने इस पल को मुमकिन बनाया था।

“तुमने मेरी ज़िंदगी को मुकम्मल कर दिया,” मैंने उसे कहा।
उसने हल्की मुस्कान दी और मेरी नन्हीं परी की ओर देखा।
“हमने एक साथ इसे पाया है,” तफसीर ने जवाब दिया।

उस पल, मैंने खुदा का शुक्र अदा किया। ये सिर्फ मेरी बेटी नहीं थी, ये हमारी मोहब्बत की कहानी का सबसे खूबसूरत अध्याय था। उसकी मुस्कान, उसकी मासूमियत, और उसकी मौजूदगी ने मेरी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी थी।

ये रात मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा तोहफा थी। मेरी बेटी सिर्फ एक बच्ची नहीं, वो एक नई ज़िंदगी है—मुझे जीने की एक नई वजह देने वाली। उसने मेरे दिल को एक नई धड़कन दी, मेरी रूह को एक नया मकसद।

तुम आई तो…
फिज़ाओं में महक फैल गई,
जैसे हर ख़ुशबू ने
तुम्हारे आ जाने का जश्न मनाया हो।

तुम आई तो…
गौरैया फिर मेरे आँगन में चहकने लगी,
जैसे उनकी हर ख़ुशी
सिर्फ तुम्हारे आने से जुड़ी हो।

तुम आई तो…
नीले आसमान ने अपनी बाँहें फैला दीं,
जैसे उसकी हर छाँव
तुम्हें सुकून देने को बेताब हो।

तुम आई तो…
ज़िंदगी में नया सुरज उग आया,
जैसे तुम्हारे नन्हें हाथों ने
हर अधूरी रात को मुकम्मल कर दिया हो।

तुम आई तो…
हर अधूरा ख़्वाब पूरा हो गया,
जैसे तुम्हारे होने से
मेरा पूरा जहाँ आबाद हो गया।

रामीन, तुम्हारे आने से
हमारी दुनिया में उजाला है।
तुम हो, तो हर पल,
एक नई कहानी है।



- आक़िव जावेद 
शाहपुर, गोंडा 
उत्तर प्रदेश 

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