छोटी सी उंगली, बड़ा सा वादा

जब उसकी नन्हीं उंगलियों ने मेरी ऊंगली को थामा, तो वो सिर्फ एक लम्हा नहीं था—वो एक एहसास था, जो दिल की गहराइयों तक उतर गया। इतनी हल्की पकड़, मगर इतना गहरा वादा। जैसे उसने कह दिया हो— “बाबा, अब हमेशा मेरा हाथ थामे रखना।


उसकी मासूमियत ने मेरी रूह को छू लिया। वो छोटी-सी मुट्ठी जो अभी कुछ भी पकड़ना नहीं जानती, उसने मेरे पूरे वजूद को अपनी गिरफ़्त में ले लिया। एक अनदेखा रिश्ता, जो लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं, सिर्फ एहसासों में बसता है।

ये बस उंगली पकड़ना नहीं था, ये मेरी जिम्मेदारियों को पकड़ना था, मेरे हर डर को मिटाना था, और मेरे हर सपने को एक नई राह दिखाना था। उस छोटे से हाथ की गर्मी में मैंने अपनी पूरी दुनिया महसूस कर ली।


रामीन, तुम्हारी इन नन्हीं उंगलियों की हल्की पकड़ मेरे लिए दुनिया की सबसे मजबूत डोर बन गई है। जब भी तुम लड़खड़ाओगी, जब भी दुनिया की भीड़ में तुम्हें अपना रास्ता खोया सा लगेगा, मैं तुम्हें तुम्हारी मंज़िल तक ले जाऊँगा। मैं तुम्हारा पहला सहारा हूँ, और तुम मेरी आखिरी दुआ। ये हाथ जब तक ताक़तवर है, तुम्हारी हिफ़ाज़त के लिए उठा रहेगा—और जब थक जाएगा, तब भी तुम्हारे लिए दुआओं में जुड़ा रहेगा।


आकिव जावेद 

मझौवा तोग शाहपुर 

गोंडा, उत्तर प्रदेश

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