बिटिया रामीन

बहुत कुछ है जो तुझसे कहने का दिल करता है... क्या ये नहीं मालूम... पर कुछ तो है... कितने ही शब्द लिखे मिटाये सुबह से... कोई भी वो एहसास बयां नहीं कर पा रहा जो मैं कहना चाहता हूँ... गोया मेरे सारे अल्फ़ाज़ गूंगे हो गए हैं। क्या तू महसूस कर सकती है वो सब, जो मैं कहना चाहता हूँ…?



तेरी मासूम हँसी जब पहली बार देखी,

ऐसा लगा जैसे वक़्त वहीं ठहर गया हो,

वो पहली नज़र का एहसास आज भी मेरे दिल में बसा है।


जब पहली बार तुझे गोद में लिया था,

तेरी नर्म हथेलियाँ मेरी उँगलियों से लिपट गई थीं, वो नन्हा-सा स्पर्श अब भी मेरी रगों में धड़कता है।


रात के आसमान में टिमटिमाते तारे,

तेरी आँखों की चमक जैसे,

एक नन्ही सी रोशनी,

जो मेरे दिल के हर अँधेरे कोने को रोशन कर देती है।


दिल चाहता है उन सुनहरे लम्हों को पिरो लूँ,

एक खूबसूरत गहने की तरह,

या फिर घुंघरू बना के अपने दिल की धड़कनों में बांध लूँ,

ताकि जब भी धड़कूँ, सिर्फ़ तेरा नाम गूंजे।



- आकिव जावेद

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