दो नन्हे दिल - एक अटूट रिश्ता
कहते हैं…
कुछ रिश्ते इस दुनिया में बनते नहीं, आसमान से लिखकर भेजे जाते हैं। उस दिन मैंने अपनी दोनों बेटियों को देखा…एक की उम्र बस डेढ़ साल, दूसरी की उम्र सिर्फ़ कुछ दिन।
मुझे लगा था कि रामीन अपनी छोटी बहन को कुछ पल गोद में रखेगी… फिर किसी और की बाँहों में दे देगी। लेकिन शायद मोहब्बत ने उसे पहले ही सब कुछ सिखा दिया था।
वीडियो में देखा जा सकता है कि जो भी अज़का को लेने के लिए हाथ बढ़ाता…रामीन उसे और कसकर अपने सीने से लगा लेती। वो बोल नहीं पा रही थी… मगर उसकी ख़ामोशी बार-बार एक ही जुमला कह रही थी— ये मेरी बहन है… इसे मुझसे दूर मत करो।
उस पल वक़्त जैसे ठहर गया।
मैंने पहली बार देखा कि मोहब्बत को रिश्तों के नाम नहीं चाहिए होते। एक नन्ही-सी बच्ची, जो अभी अपनी दुनिया भी ठीक से नहीं समझती, अपनी छोटी बहन को खोने के ख़याल से बेचैन हो रही थी।
तब समझ आया…
बहनें एक ही माँ की कोख से ज़रूर जन्म लेती हैं,
लेकिन उनका रिश्ता ख़ुदा अपने हाथों से लिखता है।
शायद इसी लिए… कुछ मोहब्बतें बोलना नहीं सीखतीं, सिर्फ़ महसूस होना सीखती हैं। और उस दिन……
रामीन ने अज़का को अपनी गोद में नहीं थामा था, उसने पूरी ज़िंदगी के लिए उसका साथ थाम लिया था। ❤️
- आकिव जावेद
शाहपुर, गोंडा, उत्तर प्रदेश, भारत
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