रामीन की आमद पर मामू के एहसास
मौला ने दिया है एक नया जीवन, इसी जीवन के हर पल को ज़िंदगी की तरह जी लेना — मुबारक हो। मुबारक हो रामीन की हर एक मुस्कान पर अपने तमाम रंज़-ओ-ग़म को भूलकर मुस्कुराना — मुबारक हो। मुबारक हो हमें, हमारी रामीन से जुड़े हर एक रिश्ते को — अप्पी को अम्मी भाई को बाबा कहलाना — मुबारक हो। किसी को खाला और ख़ालू, किसी को नानी और दादी, सजाकर एक नया रिश्ता मेरा मामू बन जाना — मुबारक हो। करे कैसे अदा तेरा शुक्रिया या रब, दिया है जो तूने ये तोहफ़ा, तेरी रहमत का नजराना — मुबारक हो। — ग़ुलाम वारिस फरेंदा खुर्द Note: This was lovingly written by (Mamu) of Rameen Javed. Published here with the writer’s kind permission.