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तुम आई तो

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तुम आई तो… खामोश दीवारों ने भी बोलना सीख लिया, जैसे घर को अब असली मायने मिले हों। तुम आई तो… समय ठहर गया कुछ पल के लिए, जैसे खुदा भी तुम्हें देख मुस्कुरा रहा हो। तुम आई तो… दुआएँ हक़ीक़त में बदल गईं, और मेरी हर थकी हुई रग में सुकून उतर आया। तुम आई तो… सपनों ने आँखों से बाहर झाँकना शुरू किया, जैसे अब उन्हें यकीन हो गया हो कि मंज़िल मिल चुकी है। तुम आई तो… हर लम्हा नया लगने लगा, हर साँस में एक अलग सी मिठास घुल गई। तुम आई तो… ज़िन्दगी ने पहली बार खुद पर नाज़ किया, क्योंकि उसने मुझे तुम्हारे जैसा तोहफ़ा दिया। रामीन  तुम सिर्फ आई नहीं — तुमने हमारी रूहों को नया रंग दिया है। तुम्हारे होने से हर मौसम खुशनुमा है, हर दिन ईद है, हर रात सुकून की दुआ है। — आकिव जावेद

आज मेरी रामीन छह महीने की हो गई

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आज मेरी बेटी रामीन अपनी ज़िंदगी के पहले छह महीने पूरे कर चुकी है -  आधे साल का ये सफर शायद दुनिया के लिए छोटा हो, मगर मेरे लिए ये सबसे खूबसूरत, सबसे मायने रखने वाला वक्त रहा। एक नन्हा सा चेहरा, जो रोज़ थोड़ा और रोशन हुआ…  एक मासूम मुस्कान, जो दिल को रोज़ थोड़ा और छू गई।  आज का दिन बेहद ख़ास है।  क्योंकि आज मेरी अम्मी और मेरी सास -  यानी रामीन  की दादी और नानी, उसे पहली बार अपने हाथों से कुछ खिलाएंगी। ये सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि वो लम्हा है जहां दो पीढ़ियों की ममता एक साथ उसकी थाली में उतर रही है। एक तरफ दादी की गोद की गर्मी, दूसरी तरफ नानी की आँखों में बरसों की दुआएं — और इन दोनों के बीच बैठी मेरी रामीन, जिसे पता भी नहीं कि आज वो कितनी मोहब्बतों की थाली में पहला निवाला लेने जा रही है। जब वो पहली बार कुछ चखेगी —  शायद हल्के से मुस्कराए, शायद चौंक कर देखे, या शायद बिना कुछ समझे, सिर्फ मासूमियत से सब कुछ महसूस करे। शायद वो निवाला छोटा होगा,  मगर उस पल में समाया होगा दादी की ममता, नानी की दुआ, और हम सबका बेइंतिहा प्यार। और फिर…  उसी लम्हे के...

दो पीढ़ियों का एक रिश्ता — अब्बू से मैं और मुझसे रामीन

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कभी किसी तस्वीर से मोहब्बत हुई है? ये वही तस्वीर है — जहाँ एक अब्बू ने सिर्फ बच्चे को नहीं थामा, बल्कि उसका कल, उसकी हिफाज़त, उसकी पहचान सब कुछ अपनी बाँहों में बाँध लिया। चेहरे पर जो मुस्कान है, वो दुनिया की हर दौलत से बड़ी है। जब इस बच्ची ने अब्बू की बाँहों में आँखें खोलीं, वो कोई आम दिन नहीं था, उस दिन कायनात ने एक नयी तहज़ीब देखी — जहाँ एक नन्हा सा जिस्म, एक बड़ी सी छाँव में महफूज़ हो गया। उसके अब्बू ने उसे उठाया नहीं था, बल्कि अपना सबकुछ उसकी हथेली पर रख दिया था। उस बच्ची को अभी बोलना नहीं आता, पर उसकी नज़रें चीख-चीख कर कह रही हैं — जो ये सीना है, यही मेरा घर है, और यही मेरा क़िला। अब्बू का चेहरा थका हुआ नहीं, बल्कि तसल्ली से भरा है — जैसे कह रहा हो: “रामीन, तेरे आने से मेरी अधूरी ज़िंदगी मुकम्मल हो गई…” और इसी लम्हे के दरमियान, मैं — आकिव जावेद, आज Father’s Day पर अपने अब्बू, जावेद मजीद साहब के लिए लिखना चाहता हूँ। आप मेरी ज़िंदगी की सबसे मजबूत दीवार हैं अब्बू  जो हर तूफ़ान को मुझसे पहले झेल गए। आपके साए ने मुझे परदेस में भी तनहा नहीं होने दिया। मैं जितना कुछ भी बन पाया हूँ, उ...

रामीन की आमद पर मामू के एहसास

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मौला ने दिया है एक नया जीवन, इसी जीवन के हर पल को ज़िंदगी की तरह जी लेना — मुबारक हो। मुबारक हो रामीन की हर एक मुस्कान पर अपने तमाम रंज़-ओ-ग़म को भूलकर मुस्कुराना — मुबारक हो। मुबारक हो हमें, हमारी रामीन से जुड़े हर एक रिश्ते को — अप्पी को अम्मी भाई को बाबा कहलाना — मुबारक हो। किसी को खाला और ख़ालू, किसी को नानी और दादी, सजाकर एक नया रिश्ता मेरा मामू बन जाना — मुबारक हो। करे कैसे अदा तेरा शुक्रिया या रब, दिया है जो तूने ये तोहफ़ा, तेरी रहमत का नजराना — मुबारक हो। — ग़ुलाम वारिस       फरेंदा खुर्द  Note: This was lovingly written by (Mamu) of Rameen Javed. Published here with the writer’s kind permission.

गाँव अब भी वहीं है - बस मैं बड़ा हो गया हूँ

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कुछ जगहें हमारे साथ बड़ी नहीं होतीं,  वो वहीं रुक जाती हैं जैसे मेरा गाँव, जहाँ वक़्त ठहरा है, और बचपन अब भी खिलखिलाता है।  वो मिट्टी के घर जिनकी दीवारें गर्मियों में ठंडी और सर्दियों में गरम लगती थीं, अब सिर्फ याद में बसी हैं।  वो दरवाज़ा जिसकी किवाड़ हर बार चूँ-चूँ करके खुलती थी, अब किसी नए मकान की खामोशी में गुम हो चुकी है। सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर गिरती थी,  मुर्गा आवाज़ देता था और अम्मी की आवाज़ आती —  चल बेटा, नहाने जा, बोरिंग का पानी अभी ठंडा ठंडा लगेगा। वो बोरिंग बस नहाने की जगह नहीं थीं,  वो हमारी हँसी, शरारत और आज़ादी की पहली पाठशाला थी।   कभी-कभी अम्मी नहलाने के बाद नारियल तेल लगाती थीं और बाल बनाती थीं — इतने प्यार से कि लगता था जैसे हर बाल को दुआओं से गूंथा जा रहा हो। आज इतने महंगे शैम्पू भी वो सुकून नहीं देते। और जब बोरिंग से नहा कर निकलते थे, तो बाहर बैठा शेरू पूँछ हिलाता मिलता था — घर का हमारा वफ़ादार कुत्ता, जो हर मेहमान को सूँघ कर आने देता था। वो भी तो हमारा ही हिस्सा था — बिना बोले, हमेशा साथ। आंगन में फैली धूल, छप्पर की छत...

रामीन की पहली ईद—बिना उसके अब्बू के

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कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ खुशियाँ भी अधूरी लगती हैं। आज वही एहसास मुझे अपनी रूह तक महसूस हो रहा है। मेरी जान, मेरी रामीन, आज तेरी पहली ईद है… और मैं तुझसे दूर हूँ। सोचता हूँ, क्या ये सच में ईद है? क्या ये वही दिन है, जिसका हर बाप अपने बच्चे के साथ इंतज़ार करता है? 27 जनवरी 2025 की वो रात जब मेरी दुनिया पूरी हो गई थी। जब मैंने तुझे पहली बार अपनी बाहों में उठाया था, तो लगा था जैसे वक्त ठहर गया हो, जैसे पूरी कायनात बस तेरा दीदार करने को रुकी हुई हो। तेरी नन्ही-नन्ही उंगलियाँ जब मेरी ऊँगली से लिपटी थीं, तब मैंने अपने रब से बस एक दुआ माँगी थी—कि कभी तुझसे दूर न जाऊँ। लेकिन आज, जब तेरी पहली ईद आई, तो मेरी ये दुआ अधूरी रह गई। बेटा, मैं नहीं जानता कि तू इस वक्त क्या कर रही होगी। शायद तू अम्मी की गोद में हंस रही होगी, शायद कोई तेरी नन्ही हथेलियों में तेरी पहली ईदी रख रहा होगा। शायद तेरा नया लिबास तेरी मासूमियत से भी ज़्यादा चमक रहा होगा। और मैं…? मैं यहाँ इस ऊँचे शहर की ऊँची इमारतों के बीच, अपने कमरे की खिड़की से आसमान को ताक रहा हूँ। कल रात जब ईद का चाँद देखा, तो दिल में...

रामीन का गुस्सा

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  आज रामीन ने ऐसी आँखें निकालीं कि पूरा घर दहशत में आ गया! उसकी घूरती हुई नज़रें इतनी तेज़ थीं कि मामू का मोबाइल अपने आप साइलेंट मोड में चला गया, 😊  इतना ग़ुस्सा देखकर खाला तो बिल्कुल पैनिक मोड में आ गईं,  😊 पर मम्मी ने तुरंत उसे गोद में उठा लिया कि कहीं बेबी बाहुबली का ग़ुस्सा फूट न पड़े! ऐसा लग रहा था जैसे कह रही हो—“मुझे दो मिनट में दूध नहीं मिला तो इस घर का नक्शा बदल दूँगी!” और जब घरवाले हंसी रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी रामीन ने एक और लेवल ऊपर जाकर होंठ टेढ़े कर लिए—मतलब, अब तो बस क़यामत आने ही वाली थी! लेकिन जैसे ही मम्मी ने प्यार से उसके गाल दबाए, जनाब का एक्सप्रेशन तुरंत बेबी सिंघम से वापस नन्ही परी बन गया।  Moral of the story—रामीन सिर्फ़ क्यूट नहीं, बल्कि एक एक्सप्रेशन आर्टिस्ट भी है, जो बिना बोले भी सबकी क्लास ले सकती है!😊