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इबादत सा इश्क़, दुआ सा एहसास

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मौन आँखों में चंद ख़्वाब और होंठों पर दुआ लिए अपनी हथेलियों से तुम्हारे नन्हे हाथ टटोलते हुए, तुम्हारी हर सांस महसूसते हुए, हर लम्हा, हर घड़ी रोज़ यूँ पढ़ता हूँ तुम्हें, गोया तुम हो इक नूरानी आयत, और मैं बेकरार सा इबादतगुज़ार, देखता हूँ तुम्हें, मगर हर बार जैसे पहली दफा हो, कभी माथे की पेशानी को चूमकर तो कभी तुम्हारे नर्म गालों को सहलाकर, ताबीज़ सा तुझे सीने से लगा लेता हूँ, कि मेरी हर दुआ बस तुझ तक पहुँचे। -आकिव जावेद 

बिटिया रामीन

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बहुत कुछ है जो तुझसे कहने का दिल करता है... क्या ये नहीं मालूम... पर कुछ तो है... कितने ही शब्द लिखे मिटाये सुबह से... कोई भी वो एहसास बयां नहीं कर पा रहा जो मैं कहना चाहता हूँ... गोया मेरे सारे अल्फ़ाज़ गूंगे हो गए हैं। क्या तू महसूस कर सकती है वो सब, जो मैं कहना चाहता हूँ…? तेरी मासूम हँसी जब पहली बार देखी, ऐसा लगा जैसे वक़्त वहीं ठहर गया हो, वो पहली नज़र का एहसास आज भी मेरे दिल में बसा है। जब पहली बार तुझे गोद में लिया था, तेरी नर्म हथेलियाँ मेरी उँगलियों से लिपट गई थीं, वो नन्हा-सा स्पर्श अब भी मेरी रगों में धड़कता है। रात के आसमान में टिमटिमाते तारे, तेरी आँखों की चमक जैसे, एक नन्ही सी रोशनी, जो मेरे दिल के हर अँधेरे कोने को रोशन कर देती है। दिल चाहता है उन सुनहरे लम्हों को पिरो लूँ, एक खूबसूरत गहने की तरह, या फिर घुंघरू बना के अपने दिल की धड़कनों में बांध लूँ, ताकि जब भी धड़कूँ, सिर्फ़ तेरा नाम गूंजे। - आकिव जावेद

छोटी सी उंगली, बड़ा सा वादा

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जब उसकी नन्हीं उंगलियों ने मेरी ऊंगली को थामा, तो वो सिर्फ एक लम्हा नहीं था—वो एक एहसास था, जो दिल की गहराइयों तक उतर गया। इतनी हल्की पकड़, मगर इतना गहरा वादा। जैसे उसने कह दिया हो— “बाबा, अब हमेशा मेरा हाथ थामे रखना। उसकी मासूमियत ने मेरी रूह को छू लिया। वो छोटी-सी मुट्ठी जो अभी कुछ भी पकड़ना नहीं जानती, उसने मेरे पूरे वजूद को अपनी गिरफ़्त में ले लिया। एक अनदेखा रिश्ता, जो लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं, सिर्फ एहसासों में बसता है। ये बस उंगली पकड़ना नहीं था, ये मेरी जिम्मेदारियों को पकड़ना था, मेरे हर डर को मिटाना था, और मेरे हर सपने को एक नई राह दिखाना था। उस छोटे से हाथ की गर्मी में मैंने अपनी पूरी दुनिया महसूस कर ली। रामीन, तुम्हारी इन नन्हीं उंगलियों की हल्की पकड़ मेरे लिए दुनिया की सबसे मजबूत डोर बन गई है। जब भी तुम लड़खड़ाओगी, जब भी दुनिया की भीड़ में तुम्हें अपना रास्ता खोया सा लगेगा, मैं तुम्हें तुम्हारी मंज़िल तक ले जाऊँगा। मैं तुम्हारा पहला सहारा हूँ, और तुम मेरी आखिरी दुआ। ये हाथ जब तक ताक़तवर है, तुम्हारी हिफ़ाज़त के लिए उठा रहेगा—और जब थक जाएगा, तब भी तुम्हारे लिए दुआओं में जुड़...

रामीन : इक नई रात

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वैसे तो दुनिया की हर रात अपनी एक कहानी लेकर आती है, लेकिन 27 जनवरी 2025 की रात जावेद परिवार के लिए कुछ खास थी। इस रात में जो खामोशी थी, वो हर रात की खामोशी से अलग थी। आसमान पर तारों की रोशनी में एक अनकही चमक थी और दिलों में एक अजीब सी बेचैनी। एक नई रात, एक नई ज़िंदगी। सर्दी की वो रात बाकी दिनों की तरह लग रही थी, लेकिन शायद आज कुदरत ने कुछ अलग सोचा था। हवा में एक अजीब सी नरमी थी, और घड़ी की सुइयां जैसे किसी खास पल का इंतज़ार कर रही थीं। ये रात बाकियों से अलग थी, क्योंकि आज मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली थी। अस्पताल के उस छोटे से कमरे में बैठा, मैं हर एक पल गिन रहा था। अंदर से नर्स की हलचल और बाहर इंतज़ार करते मेरे परिवार की दुआएं—सबकुछ जैसे ठहर सा गया था। तभी एक चीख सी सुनाई दी, और फिर कुछ ही पलों में एक मासूम सी रोने की आवाज़ मेरे कानों तक पहुंची। मेरी धड़कनें तेज हो गईं। “मुबारक हो, आपकी बेटी हुई है,” नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा। कुछ पलों के लिए जैसे पूरी दुनिया थम गई। जब मैंने उसे पहली बार देखा, वो मेरे हाथों में एक नन्हीं परी की तरह लग रही थी। उसका मासूम चेहरा, उसकी बंद आँखें, ...

हमारी पहली सालगिरह

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तफसीर, हमारी पहली सालगिरह पर सोचा कि कोई खास तोहफा दिया जाए, लेकिन समझ आया कि सबसे अनमोल चीज़ तो तुम्हारी मुस्कुराहट है। फिर भी ये छोटी सी डायमंड नोज़ पिन बस उस मुस्कुराहट को और भी खूबसूरत बनाने के लिए है। जानती हो तुम्हारी हँसी, तुम्हारी बातें, तुम्हारा साथ और ये एहसास – ये सब मेरे लिए किसी अनमोल खजाने से कम नहीं। आज हमारी पहली सालगिरह पर, ये छोटी सी डायमंड नोज़ पिन मेरी तरफ से उस अनमोल एहसास की एक निशानी है। ये सिर्फ एक तोहफा नहीं, ये मेरी मोहब्बत का वो पैगाम है जो हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा, तुम्हें ये याद दिलाएगा कि मेरी ज़िन्दगी की कई खुशी की वजह तुम हो। जैसे ये हीरा हर रोशनी में चमकता है, वैसे ही तुम मेरे हर लम्हे को रोशन करती हो। दुआ है कि हमारी ज़िन्दगी हमेशा इसी तरह खुशियों से महकती रहे। तुम्हें हमारी पहली सालगिरह पर ढेर सारी मुबारकबाद। -आकिव जावेद

मैं हूँ वो पिता

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मैं हूँ वो पिता।  जिसने तुम्हें दुनिया में लाने से पहले   तुम्हारे हर कदम की परवाह की,   तुम्हारी माँ का हाथ थामे रखा,   जब तुम्हारे आने की ख़बर से   हमारी ज़िन्दगी बदल रही थी।   न कभी अपनी ख़ुशी को तुम पर थोपा,   और न कभी तुम्हारे सपनों को दबाया। मैं हूँ वो पिता।  जिसने रातों में जागकर तुम्हें देखा,   तुम्हारी हर मुस्कान में अपनी दुनिया पाई।   जो तुम्हें सिखाना चाहता है कि   प्यार और इज़्ज़त की असली पहचान क्या है,   जो तुम्हें गिरकर फिर खड़े होने की हिम्मत देता है,   और हर कदम पर तुम्हारे साथ खड़ा है।   मैं हूँ वो पिता।  जो अपनी ख्वाहिशों को तुम्हारी माँ की मुस्कान में ढूंढ़ता है,   जो तुम्हारी माँ के हर बलिदान को समझता है,   और उसकी हिम्मत में अपनी ताकत देखता है।   मैं वो हूँ, जो घर के हर कोने में उसकी ममता की खुशबू महसूस करता है,   जो उसके साथ मिलकर तुम्हें वो सब देने की कोशिश करता है,   जिसकी तुम्हें ज़रूरत है, और जिससे तुम्हारी ज़िन्दगी संवर सके।   मैं हूँ वो पिता।   जो दुन...

ख्वाजा प्यारे नात

ख्वाजा प्यारे की महफिल सजा के जश्न उनका मनाते रहेंगे.  रास आयी उनकी गुलामी दर पे पलकें बिछाते रहेंगे.  लाए तशरीफ अजमेर ख्वाजा लगा सागर पे राजा का पहरा,  इन्हें पानी का कतरा मयस्सर ना हो लोग आते व जाते रहेंगे.  तेवर बातिल के बदले हुए देखकर हुक्म काशा को ख्वाजा ने दे ही दिया,  आया कूजे मे है सारा पानी खुद पियेंगे पिलाते रहेंगे.  बारिश की आतिशों की जयपाल ने बाल बीका हुआ ना किसी का,  जूतियां सर चढीं तौबा करके कहा दर का रस्ता दिखाते रहेगें.  किस कदर है हसीं आज मंजर हर नजर मे बसा सब्ज गुंबद,  इस अजमेर की सरजमीं पर मांगते और पाते रहेंगे.  हैं शाह व गदा सब ही यक्शां सर झुकाते हैं चौखट पे आके.  पलक झपकते ही पूरी हो दिल की तमन्ना झोली भर लो दिलाते रहेंगे.  नात की ही बदौलत ऐ 'मुफ़लिस' उनके दर की मिली है गुलामी,  परचम सरकार ख्वाजा उठा के याद ताजा कराते रहेगें.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश