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ख्वाजा प्यारे नात

ख्वाजा प्यारे की महफिल सजा के जश्न उनका मनाते रहेंगे.  रास आयी उनकी गुलामी दर पे पलकें बिछाते रहेंगे.  लाए तशरीफ अजमेर ख्वाजा लगा सागर पे राजा का पहरा,  इन्हें पानी का कतरा मयस्सर ना हो लोग आते व जाते रहेंगे.  तेवर बातिल के बदले हुए देखकर हुक्म काशा को ख्वाजा ने दे ही दिया,  आया कूजे मे है सारा पानी खुद पियेंगे पिलाते रहेंगे.  बारिश की आतिशों की जयपाल ने बाल बीका हुआ ना किसी का,  जूतियां सर चढीं तौबा करके कहा दर का रस्ता दिखाते रहेगें.  किस कदर है हसीं आज मंजर हर नजर मे बसा सब्ज गुंबद,  इस अजमेर की सरजमीं पर मांगते और पाते रहेंगे.  हैं शाह व गदा सब ही यक्शां सर झुकाते हैं चौखट पे आके.  पलक झपकते ही पूरी हो दिल की तमन्ना झोली भर लो दिलाते रहेंगे.  नात की ही बदौलत ऐ 'मुफ़लिस' उनके दर की मिली है गुलामी,  परचम सरकार ख्वाजा उठा के याद ताजा कराते रहेगें.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

है मझधार नात

है मझधार मे सफ़ीना जिए जा रहा हूं मैं,  पैगाम मुहब्बत का दिए जा रहा हूं मैं.  जिंदगी मे आए नशेबो फराज अक्सर,  माहौल से मिलाप किए जा रहा हूं मैं.  अपनों से ना शिकायत गैरों से ना गिला,  लब खुद ही अपने हाथों सिए जा रहा हूं मैं.  अल्लाह रे तेरी शान निराली है बेमिसाल,  बुझता चराग सहर लिए जा रहा हूं मैं.  गुनहगारों के सहारे हैं सरकार ऐ 'मुफ़लिस' इस उम्मीद पे भरोसा किए जा रहा हूं मैं.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

गुलामों की नात

गुलामों की सफों मे हजरते यूसुफ का नाम आया,  उधर जोशे जुनूं मे खुद ज़ुलैख़ा का पयाम आया.  बिला ताखीर यूसुफ को बुलाया महल के अंदर,  ना कोई चाल हर बा हजरते यूसुफ के काम आया.  खुदा साबित कदम रक्खे उठे हैं दस्त यूसुफ के,  हमारे नफ्स की अब आजमाइश का मकाम आया.  ना छूटा कैद मे भी सब्र व इसतकलाल का दामन,  नवाजह रब ने ऐ 'मुफ़लिस' जेरे कदम शाही निजाम आया.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

रहमत की नात

रहमत की किरन फैली सरकार आ गए हैं,  तारीकियाँ हैं सिमटी ताज़दार आ गए हैं.  ख़म हो गया है काबा ताजीम ए मुस्तफा मे,  बुत भी पड़े हैं औंधे सय्यदे इबरार आ गए हैं.  वक्ते जहूर आक़ा बू जहल था परीशाँ,  मलता रहा हथेली गम गुसार आ गए हैं.  आक़ा की कदम बोशी को हाजिर थे फरिश्ते,  जिबरीले अमीं फरिश्तों के सरदार आ गए हैं.  'मुफ़लिस' तेरी किस्मत का चमकेगा सितारा,  उम्मतियों के लिए जन्नत के मुख्तार आ गए हैं.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

अल्लाह के कुदरत नात

अल्लाह के कुदरत के आइना थे मुस्तफा,  हर दिल अजीज और सब के सहारे थे मुस्तफा.  आए थे उमर कत्ल को ले के शमशीर बरहना,  अपना बना के उनको कलमा पढ़ाए थे मुस्तफा.  हाजत थी सख्त पानी की परीशां थे सहाबा,  अंगुस्त को ही दरिया बनाए थे मुस्तफा.  शजर व हजर ताजीम मे खम होते बा अदब,  जिस सिम्त व जिस जा से निकलते थे मुस्तफा.  सारे सहाबी और हुजूर दावते जाबिर मे आए थे,  बच्चों को जिला के 'मुफ़लिस' शिकम सेर खिलाए थे मुस्तफा.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

दोशंबा की नात

दोशंबा की सुबह सादिक नबी तशरीफ लाए थे.  ज़माने मे अंधेरा था उजाला साथ लाए थे, नयी सुबह लाए थे जिंदगी दिलाए थे दुनिया के सामने.  मासूम जिंदा बच्चियों को सुपुर्द ए खाक करते थे,  उनकी मिन्नत व माजरत नज़र अंदाज करते थे,  नया सवेरा लाए थे बेटियाँ बचाए थे दुनिया के सामने.  गुमराही उरुज पे थी हावी हो गया था शैतां,  उसके नक्शे कदम पे चलके गुमराह हुआ इंसां, नयी रोशनी लाए थे गुमराही मिटाए थे दुनिया के सामने.  नफरत व जहालत शबाब पे थी जीना मुहाल था,  मुफ़लिस' रास्ते खौफनाक थे चलना मुहाल था, नया दौर लाए थे बद अमनी मिटाए थे दुनिया के सामने.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश 

गुनहगारों की नात

गुनाहगारों की तू इल्तिजा सुन ले या रब, है नेदामत की तौबा कबूल कर ले या रब. इस्लामी तालीम है उरुज पर मगर, उन्हें तौफीक अमल का हौसला दे दे या रब.  मस्जिदें तो बहुत हैं पर नमाजी नहीं,  सज्दों की तड़प सीने मे उनके बसा दे या रब.  अजब है नहीं ग़ज़ब आए किधर से,  उस आफत बला से बचाना ऐ या रब.  जरूरत है दे आज मरदे मुजाहिद,  जो किरदार बेलाली अदा करदे या रब.  गफलत की नींद ग़ालिब गाफिल है मुसलमां,  'मुफ़लिस' की मुद्दुआ है बेदार कर दे या रब.  - मुस्तफीजुल हक़ 'मुफ़लिस' मझौवा तोग शाहपुर गोंडा उत्तर प्रदेश